आजकल QR कोड हर जगह हैं: रेस्टोरेंट, विज्ञापन पोस्टर, विज़िटिंग कार्ड, प्रोडक्ट पैकेजिंग। लेकिन एक ऐसा QR कोड जो तुरंत काम करे और एक ऐसा जो यूज़र को परेशान कर दे – इन दोनों के बीच बहुत बड़ा फर्क होता है।
इस गाइड में हम आपके साथ शेयर करेंगे वे सभी ज़रूरी बातें जिनसे आप एक बेहतरीन, भरोसेमंद और कन्वर्ट करने वाला QR कोड बना सकें।
किसी भी अच्छे QR कोड के 3 बेसिक पिलर
एक सफल QR कोड तीन बातों पर टिका होता है: स्कैन की आसानी (readability), डिज़ाइन और कंटेंट की प्रासंगिकता। इन में से किसी एक को भी नज़रअंदाज़ करेंगे, तो आप कई वैल्यूएबल स्कैन खो सकते हैं।
कॉन्ट्रास्ट: आपका सबसे बड़ा साथी
गोल्डन रूल बहुत सिंपल है: हमेशा हल्की बैकग्राउंड पर गहरा रंग इस्तेमाल करें। मिनिमम सुझाया गया कॉन्ट्रास्ट लगभग 4:1 है, लेकिन अगर आप 7:1 के आसपास टार्गेट करें तो अलग–अलग लाइट कंडीशन्स में भी स्कैन आराम से हो पाएगा।
- जो अच्छे से काम करता है: सफेद पर काला, बेज पर नेवी ब्लू, हल्के पिंक पर गहरा पर्पल
- इनसे बचें: सफेद पर पीला, हल्के ग्रे पर ग्रे, कई नीयॉन रंगों का कॉम्बो
Sqanity में आप रियल-टाइम में अपना कॉन्ट्रास्ट टेस्ट कर सकते हैं और तुरंत देख सकते हैं कि आपका QR कोड आसानी से स्कैन होगा या नहीं।
यूज़ के हिसाब से सही साइज
बहुत छोटा QR कोड practically स्कैन ही नहीं होगा। नीचे कुछ मिनिमम साइज की गाइडलाइन हैं:
- विज़िटिंग कार्ड: कम से कम 2 × 2 से.मी.
- रेस्टोरेंट मेनू: लगभग 3 × 3 से.मी.
- A4 पोस्टर: लगभग 4 × 4 से.मी.
- A3 पोस्टर: लगभग 6 × 6 से.मी.
- होर्डिंग / Billboard: स्कैन की दूरी ÷ 10
याद रखने लायक फॉर्मूला: QR का मिनिमम साइज (से.मी.) ≈ स्कैन की दूरी (से.मी.) ÷ 10
कस्टमाइजेशन: स्टाइल भी, स्कैनएबिलिटी भी
आपके ब्रांड के रंगों और स्टाइल के साथ बना QR कोड आम तौर पर काफी ज़्यादा स्कैन लाता है। लेकिन अगर ओवर-डिज़ाइन किया तो स्कैन करना मुश्किल भी हो सकता है।
क्या-क्या आप सेफली कस्टमाइज़ कर सकते हैं?
- डॉट्स (modules) का कलर – लेकिन अच्छा कॉन्ट्रास्ट बनाए रखते हुए
- डॉट की शेप: स्क्वेयर, सर्कुलर या राउंडेड
- कॉर्नर और “आई” (position markers) की स्टाइलिंग
- बीच में आपका लोगो (लगभग 30% एरिया तक)
किस चीज़ से बचना चाहिए
- तीन बड़े पोज़िशनिंग स्क्वेयर को पूरी तरह बदल देना
- एक ही कोड के अंदर 2–3 से ज़्यादा रंग भर देना
- इतना बड़ा लोगो लगाना कि पैटर्न छिप जाए
- QR के चारों तरफ की सफेद सीमा (quiet zone) को कम कर देना
Error Correction Level इतना ज़रूरी क्यों है?
हर QR कोड में बिल्ट-इन एरर करेक्शन सिस्टम होता है, जिससे वो थोड़ा सा डैमेज, स्क्रैच या पार्टली कवर होने पर भी स्कैन हो जाता है। Sqanity पर आपको 4 लेवल मिलते हैं:
- L (7%): सिंपल कोड जिनमें लोगो नहीं है
- M (15%): ज़्यादातर यूज़-केस के लिए स्टैंडर्ड
- Q (25%): छोटे लोगो वाले QR कोड के लिए बढ़िया
- H (30%): जब बीच में बड़ा लोगो हो – लगभग अनिवार्य
जैसे ही आप Sqanity में लोगो ऐड करते हैं, हम ऑटोमैटिकली हाई एरर-करेक्शन लेवल सजेस्ट करते हैं ताकि स्कैन आसानी से हो सके।
प्रिंट से पहले टेस्ट ज़रूर करें
कभी भी सीधे 10,000 फ्लायर्स प्रिंट करने से पहले इन टेस्ट्स को मत छोड़िए:
- कम से कम 3 अलग-अलग स्मार्टफोन पर (iPhone + अलग-अलग Android)
- फोन की डिफॉल्ट कैमरा ऐप से – सिर्फ थर्ड-पार्टी स्कैनर से नहीं
- अलग-अलग लाइट में: इनडोर, आउटडोर, लो-लाइट
- असली प्रिंटेड मटेरियल पर, सिर्फ स्क्रीन पर नहीं
अपना परफेक्ट QR कोड अभी बनाएं
Sqanity पर प्रोफेशनल QR कोड बनाना कुछ सेकंड का काम है। हमारा आसान एडिटर हर स्टेप पर गाइड करता है और डिज़ाइन में कोई रिस्क दिखे तो आपको पहले से अलर्ट कर देता है।
Sqanity.com पर फ्री शुरू करें — किसी रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं।
